आखिर कब तक?

जानती नहीं वो क्या हुआ है उसके साथ,

पर दर्द तो उसको भी होता है,

जब क्रुरता, हैवानियत से

उसका शरीर नोंचा गया होगा,

कितना असहनीय दर्द होता होगा उसको,

जब वह अपनी मां को देखना चाहती होगी,

पर आंखें उसकी नहीं खुल पाती,

जब रोना चाहती होगी वो जोर-जोर से,

पर आवाज नहीं निकल पाती,

जब चलना चाहेंगी अपने पापा के साथ,

कदम उसके नहीं हिलते होंगे,

उसके पापा उसको देख के,

अकेले में कितना रोते होंगे,

ये बेबसी उस मां को

कितना झकझोरती होगी,

जब बेटी उसके सामने

जिन्दा लाश रहती होगी,

पर वह कुछ कर नहीं पाती होगी,

कैसे सम्भल कर वो चलें,

जब ठीक से चलना उसको आता नहीं,

वो नन्ही सी जान साड़ी कैसे पहने,

जब कपड़े पहनना उसको आता नहीं,

साड़ी उनको पहनाने वाले,

क्यों खुद नहीं बदल जाते,

उनके गुनहगारों को,

क्यों पकड़ कर वो नहीं लाते,

हम इतना बेबस क्यो है

कि उनके लिए कुछ कर नहीं पाते,

अब अपने घर को छोड़कर

तो कहां जाये वो,

जब घर से ही उठाकर ले जाते हैं हैवान,

कब तक ये मासूम बच्चियां

यूं ही होती रहेगी शिकार,

कब तक ये हैवान

अपनी हैवानियत को अंजाम देते रहेंगे,

आखिर कब तक

मासूमों की जान लेते रहेंगे,

कब तक पूरे देश को

शर्मशार करते रहेंगे,

आखिर कब तक?

पधारो म्हारे देश 😍💕😊

ये धरती है,

ऊंचे पीले धोरों की,

खेजड़ली का बसेरा,,

रोहिड़ा की खुशबू,

है इस धरती की एक अलग पहचान,

ये धरती है,

वीर-वीरांगनाओं की,

महाराणा जैसे वीर हुए,

भामाशाह जैसे दानवीर हुए,

हाड़ी रानी और रूपवती पद्मिनी,

है यहां की शान,

ये धरती है,

प्रेम-भक्ति की,

भक्ति में लीन मीराबाई,

ढोला-मारू की अनूठी प्रेम कहानी,

यहां है बच्चें-बच्चें की जुबानी,

ये धरती है,

खुबसूरत शहरों की,

जैसलमेर में ऊंट चलें,

जयपुर में तीज-गणगौर की सवारी,

जोधपुर के महल ऊंचे,

बीकानेर में दाढ़ी वाली ढोकरी,

झीला की नगरी उदयपुर,

अरावली है हरियाली से संवरी,

और कोटा-बूंदी की कहानी है न्यारी,

पुष्कर मेलें में आये विदेशाें से मेहमान,

सब धरा की है अलग ही शान,

पर राजस्थान की संस्कृति,

है यहां की पहचान,

प्रेम-सद्भावना से हैं बना हमारा ये घर-संसार,

कभी पधार के तो देखो आप,

हमारे खुबसूरत से राजस्थान।।

मुस्कान/Smile😊😍

मुस्कराते हुए चेहरे,

कितने खूबसूरत लगते हैं,

चारों ओर कैसे ये,

अपनी खुशबू छोड़ देते हैं,

जब दो अनजान लोग मिलते हैं,

वे गुफ्तगू की शुरुआत,

एक मुस्कान से ही करते हैं,

फिर भी पता नहीं कई लोग,

क्यों मुस्कुराने से डरते हैं,

छोटी सी है ये,

पर रूठों को मना लें,

हर झगड़े को खत्म कर दें,

यह एक मुस्कान ही तो है,

जो आंखों में चमक भर दें,

हमारे मां-पापा की जान,

है हमारी मुस्कान,

तो फिर कैसे हम,

इस जान को रोने के लिए छोड़ दें,

हमारी इस मुस्कान से,

हमारे दोस्तों के चेहरे खिलते हैं,

तो भला हम कैसे,

यूं मुस्कुराना छोड़ दें,

कैसे न हंसे हम,

हमारा प्यार इसे कायम रखने की,

कोशिशें करता रहता है हजार,

बस एक ही तो ख्वाहिश है उसकी,

बनी रहे हमेशा मेरी ये मुस्कान,

फिर उसकी इस एक ख्वाहिश को,

कैसे पूरा न करे हम हरबार,

आप लोग भी हमेशा हंसते रहो,

मुस्कराते रहो, खुश रहो,

क्या पता आपका कोई अपना भी,

आपकी एक मुस्कान के लिए,

कर रहा हो कोशिशें बार-बार।।

😊smile is the best medicine for any problem so always keep smiling😊

गुफ्तगू

चलों आज कुछ गुफ्तगू करते हैं,

कुछ तुम कहो,

कुछ हम कहते हैं,

आओ दिल के सारे राज खोलते हैं,

कितना कुछ है,

तेरे-मेरे बीच में,

चलों आओ आज,

उसी को आज़मा के देखते हैं,

पता नहीं ये साथ कब छूट जाये,

फिर मुलाकात कैसे हो पाये,

चलो आओ आज,

इस पल को पूरी ज़िन्दगी की तरह जीते हैं,

चलों आओ आज कुछ गुफ्तगू करते हैं।।

When I Meet Happiness 😍

One day I was sitting alone,
Then a girl came there,
She was very innocent,
She looked like a fairy,
Her face was very shining,
I asked her,
who are you?
She smiled and responded politely,
My name is happiness,
And I want to be your friend,
Will you be my friend?
i asked her,Why do you want to be my friend?
She replied,
Because you deserve it,
You have always sacrificed your happiness for others,
You gave happiness to everyone but nobody gave you ,
I said okay but if you left me alone then,
She said never,
Since that day she is my best friend,
That day I met myself,

And now whenever loneliness is felt
I spend time with my friend
I enjoy it,
She has given me lots of pleasure,
Now I like to be alone to spend time with my friend,
She does not let me down,

and this friend is My Shadow.☺️😊

प्रकृति और पर्यावरण

खुबसूरत सी ये धरती,

हरियाली सी छायी है,

गगन है इस पर लहरा रहा,

मौसम ने ली अंगड़ाई है,

झरनों से बहता पानी,

खुबसूरती पर इसके लगाते चार चांद,

पक्षी उड़े नीले गगन में,

भर के लम्बी उड़ान,

चहचहाट से उनकी,

गुंज रहा है आसमान,

बारिश सब का मन लुभाती,

अपनी इन बूंद-बूंद से,

सब का जीवन हरा-भरा कर जाती,

पर फिर भी देखो,

हम कर रहे उस पर अत्याचार,

मानव स्वार्थी हो रहा,

कर रहा पर्यावरण का विनाश,

पैरों पर कुल्हाड़ी अपने,

खुद ही मार रहा बार-बार,

एक पेड़ लगाता नहीं,

काट लेता है चार,

पानी की हर बूंद को,

रोज कर रहा बर्बाद,

ऐसे ही होता रहा अगर तो,

आने वाले समय में,

न बारिश की बूंदें होगी,

न झरनों की कल-कल करती आवाज,

न हरियाली की छांव होगी,

न गड़गड़ाहट भरा आसमान,

सरोवर, तालाब खाली होंगे,

पशु-पक्षी तड़प रहें होंगे,

मानव लगा रहा होगा गुहार,

और ऐसे ही,

हो रहा होगा जीवन का सर्वनाश।।

बचपन

बचपन भी क्या खूब था,

वो खिलखिलाकर हंसना हमारा,

चलते-चलते वो गिर जाना,

मिट्टी के वो खिलोने बनाना,मिट्टी में घरोन्दे बनाना,

वो सारा दिन खेलना,

गांव की वो गलियां,

जहां सुबह शाम चक्कर लगाना,बचपन के वो खेल खेलना,

साईकिल का वो पहिया,
जिसको लेकर दौड़ना,

खेत खलिहानों में वो घूमना,

कब सुबह से शाम हो जाती,

पता ही नहीं चलता था,

सुकून भरी वो नींद,

सुबह अपने आप आंखें वो खुल जाना,

हर घर में बिस्किट वो Parle-G,वो सारे बहन-भाइयों का एक जैसे कपड़े पहनना,

दोस्तों से वो लड़ना,

पर थोड़ी देर में राजी वो हो जाना,

तब कोई दोस्त #busy नहीं था,

आज का दोस्त #busy हो गया है,

दुनिया से जैसे कट सा गया है,

आज न वो बचपन है,

न वो बचपन की हंसी,

न वो गांव की गलियां हैं,

न वो मिट्टी के खिलौने,

शहर की इस चकाचौंध में,

आधुनिकीकरण की इस तकनीक में,

जैसे खो गया है बचपन।।